नई दिल्ली (राघव): रक्षा विनिर्माण में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत पहल को आगे बढ़ाते हुए , भारतीय नौसेना ने 6 मेगावाट मध्यम गति वाले समुद्री डीजल इंजन के डिजाइन और विकास के लिए किर्लोस्कर ऑयल इंजन लिमिटेड के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, मेक-I श्रेणी के तहत 50 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री वाले प्रोटोटाइप डीजल इंजन का विकास 270 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा, जिसमें 70 प्रतिशत वित्त पोषण सरकार द्वारा किया जाएगा।
दिल्ली में रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की उपस्थिति में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें 3-10 मेगावाट डीजल इंजन के लिए विस्तृत डिजाइन का विकास भी शामिल है। बयान में कहा गया है कि विकसित इंजनों का इस्तेमाल नौसेना और तटरक्षक बल के जहाजों पर मुख्य प्रणोदन और बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। सरकार के अनुसार, उच्च क्षमता वाले ये समुद्री डीजल इंजन अब तक विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) से आयात किए गए हैं। इस परियोजना से देश में समुद्री इंजन विकास में आत्मनिर्भरता हासिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
बयान में कहा गया, ‘‘यह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को स्वदेशी बनाने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए चल रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है।’’ बयान में कहा गया है कि इस सौदे को स्वदेशी क्षमताओं को और मजबूत करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और विदेशी ओईएम पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से लागू किया गया है। यह देश में रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा।